आगरा पुलिस ने की कानून की हद पार……

आगरा पुलिस किस तरह से रस्सी का सांप बनाती है इसका एक और उदाहरण जैतपुर थाना पुलिस ने दिया है। लगभग दो हफ्ते पहले पुलिस ने अवैध शराब बेचे जाने की सूचना पर होटल संचालक धर्मेंद्र उर्फ धन्ना को गिरफ्तार किया था जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। गिरफ्तारी के दौरान उसके साथ किस तरह से बेरहमी के साथ पिटाई की गई। अवैध शराब के धंधे को कबूलवाने के लिए पुलिस ने किस तरह से कानून की हर हद पार कर दी इसकी जानकारी खुद धर्मेंद्र ने एक वीडियो के माध्यम से दी यह वीडियो भी तेजी के साथ वायरल हुआ था। धर्मेंद्र उर्फ धन्ना की मृत्यु होने से समाज के साथ-साथ ग्रामीणों में भी आक्रोश व्याप्त है।

होटल संचालक धर्मेंद्र उर्फ धन्ना की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक धर्मेंद्र का शव बीती रात जैसे ही गांव पहुंचा भारी संख्या में ग्रामीण व समाज के लोग मृतक के घर जमा हो गए। मृतक के परिजनों ने भी धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। भारी संख्या में ग्रामीणों के जमा होने व अंतिम संस्कार न किये जाने की सूचना पर पुलिस के भी हाथ-पांव फूल गए। पुलिस के आला अधिकारियों ने गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर उसे छावनी बना दिया। होटल संचालक धर्मेंद्र उर्फ धन्ना की मौत के लिए उसके परिजन व समाज के लोग क्षेत्रीय पुलिस को जिम्मेदार मान रहे हैं और उन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे है। मामले को बिगड़ता देख पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुँच गए और मृतक के परिजनों व समाज के लोगों को समझाने लगे लेकिन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी इसके लिए कोई आश्वासन देने को भी इलाज नहीं हुआ।

मामला थाना जैतपुर क्षेत्र के कस्बा नदगवां मार्ग का है। मृतक धर्मेंद्र एक होटल संचालक था। लगभग दो हफ्ते पहले क्षेत्रीय पुलिस ने उसे अवैध शराब बेचने के जुर्म में उठाया था। सूत्रों की माने तो पुलिस ने बेरहमी के साथ उसकी पिटाई की थी। जिससें उसके गंभीर चैट आई थी और उसका स्वास्थ्य भी खराब हो गया था। आनन फानन में क्षेत्रीय पुलिस ने कानूनी कार्यवाही कर उसे जेल भेज दिया था। बताया जाता है कि अप्रैल को उसकी जिला जेल में तबियत ज्यादा बिगड़ी तो जिला जेल प्रशासन ने उसे इलाज के लिए एयरटेल में भर्ती कराया गया लेकिन वहां के चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली रेफर कर दिया यहां एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। धर्मेंद्र की मौत तीन तारीख को हुई जिसकी सूचना चार तारीख को जिला जेल प्रशासन को मिली इस पूरे मामले में पुलिस कर्मी सन लिप्त है तो धर्मेंद्र का पोस्टमार्टम भी तीन दिनों में हो पाया जिसके बाद उसका शव आगरा पहुंचा। धर्मेंद्र के शव के गांव में पहुँचते ही चीख पुकार मच गई। भारी संख्या में मौजूद लोगो ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। घटना की जानकारी होते ही पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुँच गए। मृतक के परिजनों पर धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार करने के लिए दबाब बनाने लगे लेकिन मृतक के परिजन व समाज के लोग दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की जिद्द पर अड़े रहे।

बताया जाता है कि खाकी एक बार फिर दागदार न हो इसके लिए सभी इंतजाम कर लिए गए है। जिला जेल अस्पताल की ओर से पत्र जारी कर कहा गया है कि जब धर्मेंद्र को जेल लाया गया था तो उसका चिकित्सीय परीक्षण किया गया था जब वह स्वस्थ्य था लेकिन उसने दो साल पहले कुत्ता काटने की बात नही बताई। कुछ दिनों बाद उसने पानी से डरने की शिकायत पर हइड्रोफोबिया की बीमारी के तहत भर्ती किया गया। इसके बाद उसे एसएन में भर्ती कराया गया। फिलहाल मामले को बेरहमी के साथ कि गयी मारपीट को कुत्ते काटने से स्वास्थ्य बिगड़ने से मौत होने की ओर मोड़ा जा रहा है।

फिलहाल मृतक धर्मेंद्र के भाई मुकेश ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम प्राथना पत्र दिया है और उसमें सकफ लिखा है कि 25 को धर्मेंद्र को यह कहकर उठाया गया कि थाने में भोजनालय वालो की मीटिंग है। 11 बजे तक वो नही लौटा तो जांच पड़ताल की तो पता चला कि अवैध शराब के झूठे केस में उसे नामजद कर दिया और अगले दिन जेल भेज दिया। तीन तारीख को जब उसकी तबियत बिगड़ने की सूचना पर दिल्ली हॉस्पिटल मिले तो धर्मेंद्र ने सारी कहानी बताई की किस तरह से जैतपुर एसओ योगेंद्र पाल सिंह, एसआई ज्ञान प्रसाद व स्टाफ ने बेरहमी के साथ मारपीट की और यह सब राकेश यादव पुत्र वेद सिंह निवासी जैतपुर और मिंटू उर्फ राकेश के कहने पर पुलिस ने उसके साथ इस घटना को अंजाम दिया है। पीड़ित ने एसएसपी से इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

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