आम आदमी के लिए समझ से बाहर ही रहा बजट……

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आम आदमी के लिए समझ से बाहर ही रहा आम आदमी इस बजट में अपने लिए कुछ ना कुछ ढूंढता ही रहा जो शायद उसे अगले बजट तक मुश्किल में ही मिले हालांकि आयकर की बात करें तो एक बड़ी राहत सरकार ने 130 करोड़ की आबादी वाले देश में 15 से 20000 लोगों के लिए दी है। जिसमें 75 वर्ष से अधिक की आयु के के उन लोगों को आयकर जमा नहीं करना होगा जिनकी आय का स्रोत केवल पेंशन और बैंक की ब्याज है । सीए मोहन कुकरेजा बताते हैं कि कारोबारी व उद्योगपतियों को 75 वर्ष की आयु के बाद भी अपना आयकर पूर्व की तरह ही जमा करना होगा।

सीए इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष शरद पालीवाल ने कहा कि यह बजट कोरोना महामारी के बाद का है लिहाजा इस पर हेल्थ पर अधिक जोर दिया गया है साथ ही इस बजट में आयकर सही तरह से जमा करने वाले लोगों को बड़ी राहत दी गई है वहीं पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल कुकरेजा ने बताया कि यह कोरोना के बाद का बजट है इसी कारण इसमें आम आदमी को ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए । कोरोना महामारी के दौरान सरकार पर खर्च का बोझ अधिक था । लिहाजा इस बजट के माध्यम से आय के स्रोत अधिक खोजे गए हैं । वह कहते हैं कि रात की बात बस यही है कि कुरोना को लेकर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया गया है।

वहीं पूर्व अध्यक्ष सुदीप जैन ने कहा कि छोटी कंपनियों का दायरा यह बढ़ाया गया है ।अब छोटी कंपनियों की लिमिट पूंजी निवेश के आधार पर दो करोड़ व टर्नओवर के आधार पर 20 करोड़ कर दी गई है। वहीं यह बजट इमानदारी से कर जमा करने वालों के लिए बड़ी राहत भरा है ।

वही बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गई है । साथ ही एलआईसी का आईपीओ लाने की घोषणा भी इस बजट में की गई है। आर्थिक जगत का मानना है कि सरकार के इन दोनों फैसलों से आम आदमी को ही फायदा होगा बाजार में बीमा क्षेत्र में जितना अधिक कंपटीशन होगा उतना ही आम लोगों को फायदा रहेगा तो वही एलआईसी जो समय-समय पर सरकार को आर्थिक परेशानियों से उबारती आई है आईपीओ आने के बाद उस पर पैसा और बढ़ेगा साथ ही भारतीयों की हिस्सेदारी सीधी सीधी एलआईसी में होगी।

हालांकि इस बजट को लेकर आम व्यक्ति हो या फिर विपक्षी राजनीतिक दल वे मानते हैं कि इस बजट में आम व्यक्ति को कुछ नहीं मिला है सरकार ने केवल पूंजी पतियों का ही ध्यान रखा है और 6 वर्ष पुराने आयकर के मामलों को न खोलने की घोषणा करते हुए कर चोरी करने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है ।

आगरा आर्थिक सलाहकार हो या फिर चार्टर्ड अकाउंटेंट वे मानते हैं कि यह बजट आम आदमी का ना होकर भले ही क्रीमी लेयर या पूंजी पतियों का लग रहा हो लेकिन इस बजट का उद्देश्य आय के नए साधन जुटाना है।

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