मेयर के बाद अब इस वरिष्ठ चिकित्सक ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए कई सवाल..

आगरा। कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के मामले में आगरा उत्तर प्रदेश में लगातार पहले पायदान पर बना हुआ है। यहां जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है। कोरोना वायरस से संक्रमित 9 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा इलाज के अभाव में कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। ऐसी संवेदना को देखते हुए महापौर नवीन जैन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर अपना शहर बचाने की गुहार लगाते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाया था। महापौर नवीन जैन का यह पत्र पूरे देश में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। महापौर नवीन जैन के बाद शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ ओ पी यादव ने भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिया है, साथ ही मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए जिला प्रशासन निजी चिकित्सकों को रियायत दे जिससे चिकित्सक अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों का इलाज कर सके और उनकी जान बचा सके।

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ ओपी यादव का मानना है कि अप्रैल, मई और जून का यह महीना मासूम बच्चे और किशोरावस्था के बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसी मौसम में बच्चों को डायरिया, हैजा और मलेरिया जैसी बीमारियां होती है जिससे इलाज के अभाव में मासूम बच्चों की मौत हो सकती है। ऐसे में शहर के चिकित्सक बेहद परेशान नजर आ रहे हैं।वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओपी यादव इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के दो बार सचिव भी रह चुके हैं। ऐसे में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओपी यादव ने जहां जिला प्रशासन से अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए गुहार लगाई है तो वहीं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान भी उठा दिया है। निजी तौर पर प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओपी यादव का कहना है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर कितना ही चिंतित है। उन्होंने जिला प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि आपने एसएन इमरजेंसी की दो से तीन हजार की प्रतिदिन की ओपीडी को कोविड-19 को लेकर बंद कर दिया है तो फिर इतनी संख्या में शहर का मरीज कहां पर इलाज कराएं। इतने कड़े मानक होने के बावजूद आप कोविड-19 के केस को नहीं रोक पा रहे हैं। यानी स्थिति साफ है कि आप बिना शहर के चिकित्सकों के सहयोग से कोविड-19 और अन्य बीमारियों पर शिकंजा नहीं कस पाएंगे उनका कहना है कि अगर इस मौसम में जनित संक्रमण के चलते मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर इसे रोक पाना मुमकिन नहीं होगा। ऐसे में पहले से ही सचेत रहने की आवश्यकता है।

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