अमूल मिल्क की सप्लाई ने सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ाई धज्जियां…………….

खुले दूध के बजाय पैक्ड मिल्क की सप्लाई के प्रशासनिक फैसले ने आगरा शहर में दूध की व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है जिसका नतीजा है कि एक ओर जहां लोगों को दूध नहीं मिल पा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सोशल डिस्टेंसिंग की मंशा को भी पलीता लग रहा है पिछले 2 दिनों से आगरा शहर में दूध की सप्लाई ठप पड़ी हुई है जिसका नतीजा यह रहा कि सुबह 3:00 बजे से ही लोग दूध की तलाश में यहां वहां भटकते नजर आए..

प्रशासन ने अमूल दूध की पूरे शहर में सप्लाई की बात कही थी लेकिन ना ही प्रशासन के पास इतनी दूध की उपलब्धता हो सकी और ना ही इतनी मैन पावर है कि शहर की हर गली मोहल्ले तक दूध की सप्लाई की जा सके…यही कारण रहा कि सुबह 3:00 बजे से ही लोग दूध के लिए भटकते नजर आए…. जिन केंद्रों पर पैक्ड मिल्क की सप्लाई होती है वहां सुबह 3:00 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही थी एक 1 लीटर दूध के लिए लोगों में मारामारी हो रही थी एमजी रोड पर सुभाष पार्क के सामने भी इसी तरह से अमूल दूध की सप्लाई का एक केंद्र है जहां सुबह भारी भीड़ नजर आई.. सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर एक 1 मीटर खड़े होना तो दूर लोग एक के ऊपर एक गिरे जा रहे थे एक थैली दूध के लिए यहां आपस में खींचतान होती नजर आ रही थी और इन लोगों को यहां देखने की कोई व्यवस्था करने को पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं था…

लोगों का कहना था कि जब प्रशासन के पास दूध की सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है तो फिर पैक्ड मिल्क की सप्लाई को ही एकमात्र विकल्प क्यों माना जा रहा है जिन घरों में छोटे बच्चे हैं उन घरों के लोग तो काफी परेशान नजर आ रहे थे और दूध के लिए लड़ते झगड़ते या दुकानदारों से उलझते नजर आ रहे थे वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के जो दूध के शहर में दूध की सप्लाई करते हैं उनकी अलग परेशानी थी कि रोज आने वाले हजारों लीटर  दूध का क्या करें.. आलम यह है कि जहां एक और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाला सैकड़ों लीटर दूध बट नहीं पा रहा है तो वही आम शहरी को एक-एक बूंद दूध के लिए तरसना पड़ रहा है……

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